Followers

Pages

Sunday, February 28, 2016

क्या यह ठीक है


शिक्षा के मंदिर जब शराब और अय्याशी के अड्डे बन जाएँ तो किसी भी भारतीय का सर कैसे फक्र से ऊँचा हो सकता है ? देश की भावी पीढ़ी उनमें कैसे अपने संस्कार सीख पायेगी यह इस देश की भावी पीढ़ी को ख़त्म करने की एक साजिश है।

विद्वता


सिर्फ डिग्री किसी की विद्वता और देश प्रेम की निशानी नहीं है। डिग्री तो वो भी ले रहे हैं जो देश द्रोह के नारे लगा रहें हैं जबकि उनसे कम पड़ी लिखी मंत्री उनको उनसे बेहतर जवाब दे रही है।

रेल बजट


प्रभुजी क्या होगा ? रेल बजट में बहुत सारी नई रेल चलाने की घोषणा नहीं की आपने ? टाइम से चलेगी तो भारतीय रेल कैसे कहलाएगी ?.प्रभुजी आप लोगों को सपने नहीं बेच पाये .खेर बधाई ..यथार्थ के धरातल पर आपके रेल बजट के लिए ...किराया और माल भाड़ा नहीं बढ़ाकर आपने लोगो को सीधे सीधे राहत तो दी पर उनको याद है बीच बीच में आपके द्वारा जारी सात फरमानों ने उनकी यात्रा पहले ही महँगी कर दी थी .अब आपने उनको थोड़ा सुकून दिया है ..रेल की रफ़्तार बढ़ा कर यात्रियों को स्टेशन दर स्टेशन सुविधा बढ़ा कर आप ... अधिक देखें

मध्य प्रदेश का बजट


मध्यप्रदेश के वित्तमंत्रीजी ने जो बजट पेश किया है इसमें उन्होंने प्रत्येक परिवार को एक घर की धारणा को तो भुला ही दिया है .. उन्होंने रजिस्ट्री में 1 % अतिरिक्त नगरनिगम कर में वृद्धि करके संपत्ति के मूल्यों में और इजाफा ही किया है .इसके साथ ही जो उपकर 0 .125 % था उसको बढ़ा कर 0 .5% कर दिया है याने लगभग 1 .375 % की वृद्धि प्रस्तावित है किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री पर ...पहले प्रदेश में 10 -11 % तक रजिस्ट्रेशन शुल्क लगता था ..उसको अन्य प्रदेशों और केंद्र की सलाह पर 5 % तक किया जाना था वर्तमान में किसी भी संपत्ति की खरीदी पर 8 % के करीब रजिस्ट्रेशन शुल्क लगता है अब यह बढ़ कर 9 .% से अधिक हो जायेगा....पिछले 5 वर्षों से गाइड लाइन में बेतहाशा वृद्धि करके सरकार ने पहले ही रजिस्ट्री के माध्यम में होने वाले राजस्व में कमी कर ली है ...अब यह वृद्धि इस दिशा में एक और अवरोध बन जाएगी ..वित्तमंत्री जी यदि गाइड लाइन को यथार्थ के आसपास लाएं तो शायद राजस्व में काफी वृद्धि हो सकती है ..बजट में प्रस्तावित कर वृद्दि को रोक भी दें और गाइड लाइन को कम करके उससे अधिक राजस्व पाया जा सकता है क्योंकि अभी काफी लोग रजिस्ट्री से दूर हैं. केवल बैंक लोन या अन्य क़ानूनी प्रक्रिया में उलझे लोग ही रजिस्ट्री करा रहें है ..काफी लोगो ने रजिस्ट्री के विकल्प तलाश कर उनपर ही अपना व्यवहार किया है .इससे सम्पतियों का टर्नओवर बंद ही हो गया है ....यदि वित्तमंत्री जी सम्पत्तियों से अधिक राजस्व की अपेक्षा रखते हैं तो उनको इस कर वृद्धि और गाइड लाइन की समीक्षा पर ध्यान देना होगा .

आरक्षण

आरक्षण के लिए आर्थिक आधार पर मांग तो ठीक है ..क्या वाकई अब आरक्षण पर पुनर्विचार की जरुरत है ..उसके आधार की समीक्षा होनी चाहिए या नहीं ? पर प्रश्न यह है कि क्या जातिगत आधार पर उन लोगों को आरक्षण दिया जाना चाहिए जिन्होंने अरबों रुपयों की संपत्ति को नष्ट कर दिया और देश के एक हिस्से को बंधक बनाया ..जिन्होंने माँ बहनों की इज्जत भी नहीं की और उनको सरे राह बेइज्जत किया ...?

Saturday, April 9, 2011

एम्बुलेंस को रास्ता दें या नहीं ?

इसके पहले के एक ब्लॉग में मैंने एम्बुलेंस के सायरन को सुन कर भी लोगो द्वारा जगह न दिए जाने के बारे में लिखा था . लेकिन २४ मार्च २०११ के समाचार पत्र में छपी एक खबर ने तो हिला कर रख दिया है . में यह खबर जस की तस यहाँ लिख रहा हूँ . बदमाशों ने रोकी एम्बुलेंस - माँ शिशु मरे. खातेगाव , एक प्रसूता को लेकर जा रही जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस को कुछ बदमाशों ने रास्ते में रोक लिया . विवाद के दौरान प्रसूता ने एम्बुलेंस में ही शिशु को जन्म दे दिया . लेकिन विवाद के कारण देर होने से शिशु की एम्बुलेंस में ही मौत हो गयी और प्रसूता ने खातेगाव अस्पताल में दम तोड़ दिया . प्रसूता मनीता पति गोपाल को मंगलवार सुबह खातामाव से हरणगाव लाया जा रहा था . मंचवास में बीच सड़क पर बाईक खड़ी देख जननी एक्सप्रेस के चालक शहीद खान ने सायरन बजाया.यह बदमाशों को इतना नागवार गुजरा की उन्होंने चालक से गाली गलोच शुरू कर दी . विवाद करीब ३५ मिनिट तक चलता रहा . इसी दौरान मनीता ने एम्बुलेंस में ही शिशु को जन्म दे दिया . चालक एम्बुलेंस को लेकर हरणगाव उप स्वस्थ्य केंद्र पहुंचा .जहाँ ए एन एम् निरुलता गौंड ने शिशु की मौत की घोषणा की . बाद में प्रसूता को खातेगाव भेजा गया वहा उपचार के बाद भी उसे बचाया न जा सका . क्या ऎसी घटना के बाद भी हम एम्बुलेंस के रास्ते में बाधा बनेंगे या सायरन सुन कर तुरंत एक तरफ होकर उसको रास्ता देंगे ?